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Saturday, July 13, 2019

74वां संविधान संशोधन अधिनियम| 74th contitutional amedment

74वां संविधान संशोधन अधिनियम| 74th contitutional amedment


इस पोस्ट के माध्यम से आप 1992 में हुए 74 वां संविधान संशोधन अधिनियम के बारे में संपूर्ण जानकारी हासिल कर सकते हैं जैसे कि 74वां संविधान संशोधन अधिनियम की विशेषताएं, नगर पालिका में निर्धारित कार्य उसे प्रदान की गई शक्तियां ,आरक्षण आदि।
74वां संविधान संशोधन अधिनियम| 74th contitutional amedment
nagar-palika

भारत में शहरीय स्थानीय शासन का अर्थ शहरी क्षेत्र के लोगों द्वारा चुने प्रतिनिधियों से बनी सरकार , शहरी स्थानीय शासन का अधिकार क्षेत्र राज्य सरकार द्वारा निर्धारित शहरीय क्षेत्र तक सीमित है ।
नगरीय शासन की प्रणाली को 74 वें संविधान संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा संवैधानिक दर्जा मिला हुआ है।

74 वां संशोधन अधिनियम


1992 में 74वां संशोधन अधिनियम पारित हुआ। इस अधिनियम में भारत के संविधान में नया भाग 9 क शामिल किया। इसे नगरपालिकाएं नाम दिया गया। यह अधिनियम अनुच्छेद 243 डब्लू से संबंधित है। इस अधिनियम के कारण संविधान में एक नई  सूची को भी जोड़ा गया है।

74वां संशोधन अधिनियम की प्रमुख विशेषताएं


तीन प्रकार की नगरपालिकाएं -यदि नियम प्रत्येक राज्य में निम्न तीन तरह के नगर पालिकाओं की संरचना का उपबंध करता है।
नगर पंचायत-यह वह क्षेत्र है जो ग्रामीण क्षेत्र से सहरी क्षेत्र में परिवर्तित हो रहा हो।

नगर पालिका परिषद-छोटी शहरी क्षेत्रों के लिए।

नगर पालिका निगम-बड़ी शहरी क्षेत्रों के लिए नगर पालिका निगम की व्यवस्था करने की बात की गई है।

नगर पालिकाओं की संरचना।


74वां संविधान संशोधन अधिनियम  कहता है कि नगर पालिका के सभी सदस्य नगर पालिका क्षेत्र के लोगों द्वारा चुने जाएंगे।इस उद्देश्य के लिए राज्य नगर पालिका  निर्वाचन क्षेत्रों यानी कि वार्ड में बांटने का कार्य करेगा।या राज्य के विधानमंडल पर निर्भर है कि नगर पालिका के अध्यक्ष का निर्वाचन वह किस प्रकार करता है यानी कि वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चुना जा सकता है या उसकी नियुक्ति की जा सकती है।

यह संशोधन अधिनियम नगर पालिकाओं में प्रतिनिधित्व की भी व्यवस्था करता है। जो निम्नलिखित है।

१-वह व्यक्ति भी नगरपालिका में प्रतिनिधित्व कर सकता है जो नगर पालिका के प्रशासन के संबंध में विशेष ज्ञान ,अनुभव या दोनों रखता हो, परंतु उसे सभा में वोट डालने का अधिकार नहीं होगा।

२-राज्य विधान मंडल द्वारा निर्मित समितियों के अध्यक्ष भी इसके प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। शिवाय वार्ड समितियों के ।
३-नगर पालिका का पुण या अंशतः क्षेत्र से आने वाले  लोकसभा या राज्यसभा विधानसभा के सदस्य।

४-राज्य सभा या राज्य विधान परिषद के सदस्य जो नगर पालिका क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकृत हो।

नगर पालिका में आरक्षण


अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण-यह अधिनियम उनकी जनसंख्या और कुल नगर पालिका क्षेत्र की जनसंख्या के अनुपात में प्रत्येक नगरपालिका में आरक्षण प्रदान करता है।

महिलाओं के लिए आरक्षण-यह अधिनियम महिलाओं के संबंध में कुल सीटों की एक तिहाई (जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सीटें भी सम्मिलित हैं ) को आरक्षण प्रदान करता है।

नगरपालिकाओं का कार्यकाल-संविधान संशोधन अधिनियम प्रत्येक नगरपालिका की कार्यकाल अवधि 5 वर्ष निर्धारित करता है इसके बाद एक नगर पालिका का गठन होगा यद्यपि इसे इसकी अवधि से पूर्व भी समाप्त किया जा सकता है।
इसके 5 वर्ष की अवधि समाप्त होने से पूर्व या इसके विघटन होने की दशा में इसके गठन होने की तिथि से 6 माह की अवधि के अंदर नगर पालिका का गठन हो जाना चाहिए।

राज्य निर्वाचन आयोग-नगर पालिकाओं के चुनाव से संबंधित सभी प्रक्रियाओं की देखरेख निर्देशन एवं नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग के हाथों में है। नगर पालिकाओं के चुनाव संबंधित सभी मामलों पर राज्य विधानमंडल उपबंध बना सकता है।


नगर पालिका की शक्तियां और कार्य


राज्य विधान मंडल जो है नगरपालिका को आवश्यकतानुसार ऐसी शक्तियां और अधिकार दे सकता है जिससे कि वह स्वतंत्र सरकारी संस्था के रूप में कार्य करने में सक्षम हो इस तरह की योजना में उपयुक्त स्तर पर नगर पालिकाओं के अंतर्गत शक्तियां और जिम्मेदारी आती है।

१-आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के कार्यक्रमों को तैयार करना।

२-आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के कार्यक्रमों को कार्यान्वित करना जो उन्हें दिए गए  हैैं, जिसमें बारहवीं अनुसूची के 18 मामले भी शामिल है।

३-राज्य विधान मंडल नगर पालिका को वसूली उपयुक्त कर का निर्धारण चुंगी यात्री कर शुल्क लेने का अधिकार पथ कर काम सौंप सकती है।

४-राज्य की संचित निधि से नगरपालिका को सहायता के रूप में अनुदान प्रदान है|

५-राज्य वित्त आयोग जो पंचायतों के गठित किया गया है वह हर 5 वर्ष में नगर पालिकाओं की वित्तीय स्थिति पुनरावलोकन करने का अधिकार है और राज्यपाल को सिफारिशें कर सकता है इसके साथ ही केंद्र वित्त आयोग भी राज्य में नगर पालिकाओं के पूरक स्रोतों की राज्य की संचित निधि में वृद्धि के लिए आवश्यक उपायों के बारे में सलाह दे सकता।

बारहवीं अनुसूची में शामिल नगर पालिका के कार्य क्षेत्र
की विषयवस्तुए


1-नगर के लिए योजना तैयार करना
2-भूमि उपयोग का भी नियम और भवनों का निर्माण
3-आर्थिक एवं सामाजिक विकास योजना
4-सड़क एवं पुल
5-घरेलू औद्योगिक एवं वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए जल प्रदाय
6-लोक स्वास्थ्य स्वच्छता सफाई और कूड़ा करकट प्रबंधन
7-अग्निशमन सेवाएं
8-वन वानिकी पर्यावरण संरक्षण एवं परिस्थितिकी आयोगों की अभिवृद्धि।
9-समाज के कमजोर वर्गों के हितों का संरक्षण जिनमें मानसिक रोगी वह विकलांग भी शामिल है
10-गंदी बहती सुधार और प्रोन्नयन
11-नगरी निर्धनता उन्मूलन
12-नगरीय सुख सुविधाओं जैसे पार्क उधान खेल के मैदानों की व्यवस्था आदि।
13-सांस्कृतिक शैक्षिक व सौंदर्य आयामों की अभिवृद्धि
14-शौ गाड़ना तथा सौदा क्रिया व श्मशान और विद्युत शौ दाह गृह
15-कांजी हाउस पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण।
16-जन्म व मृत्यु से संबंधित महत्वपूर्ण सांख्यकी।
17-जन सुविधाएं जिनमें मार्गो पर विद्युत व्यवस्था पार्किंग स्थल बस स्टैंड तथा जन सुविधाएं सम्मिलित है।
18-वधशालाओं और चर्म शोधन शालाओं का विनियमन।

note-भारत का राष्ट्रपति इस अधिनियम के बंधुओं को किसी भी केंद्र शासित क्षेत्रों में लागू करने के संबंध में निर्देश दे सकता है सिवाय कुछ छुट और परिवर्तनों के जिन्हें वे विशिष्टतः बताएं।

note-यह अधिनियम राज्यों के अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों पर लागू नहीं होता।ना ही यात्रियों बंगाल की दार्जिलिंग गोरखा हिल परिषद की शक्तियों और कार्यवाही को प्रभावित नहीं करता।

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