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Sunday, April 26, 2020

व्यवस्थापिका के अर्थ एवं कार्यों का विवेचन कीजिए

व्यवस्थापिका के अर्थ एवं कार्यों का विवेचन कीजिए

व्यवस्थापिका का अभिप्राय


व्यवस्थापिका सरकार का सबसे महत्वपूर्ण अंग होती है|यह  जनता का दर्पण है |स्टुांग  के अनुसार "आधुनिक संवैधानिक राज्य में सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग व्यवस्थापिका अथवा कानून बनाने वाली संस्था होती है|" विभिन्न देशों में वयवस्थापिका को अलग-अलग नामों से जाना जाता है इंग्लैंड और भारत में इसे संसद कहते कहा जाता है| जापान में डायट तथा अमेरिका में कांग्रेस कहां जाता है |चीन की व्यवस्थापिका का नाम राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस कहां जाता है| 

आधुनिक समय में नियम निर्माण का कार्य करने वाली संस्थाओं को व्यवस्थापिका कहा जाता है| लेकिन इसका यह तात्पर्य नहीं है कि नियम निर्माण का कार्य हमेशा से व्यवस्थापिका ही करती रही है प्राचीन समय में नियम निर्माण का कार्य वयवस्थापिका  नहीं करती थी क्योंकि उन दिनों कार्यपालिका एवं विधायिका के कार्यों में कोई भेद नहीं था विस्थापन नियम निर्माण संगठनों के रूप में कब और क्यों विकसित हुई इस प्रश्न का उत्तर देते हुए स्टूांग ने लिखा है, "आधुनिक युग में सरकारों में व्यवस्थापिका लोकतंत्र के चढ़ते ज्वार के अनुपात में उभरती हुई है इस दृष्टि से यह सरकार का प्राचीन निकाय है व्यापक अर्थ में व्यक्तियों का वह समूह जो कोई प्रतिनिधियात्मक आधार नहीं रखते हुए भी शासक को नियम निर्माण में परामर्श, सहायता या प्रेरणा देने का कार्य करता है व्यवस्थापिका कहां जाता है"

मोटे अर्थ  में व्यवस्थापिका व्यक्तियों का ऐसा सामूहिक संगठन है जो कानून बनाने के अधिकार से युक्त  होता है व्यवस्थापिका उन्हीं निकायों को कहा जाता है जो एक निश्चित भू भाग  से संबंधित समाज के लिए कानून बनाने एवं नीति संबंधी निर्णय लेने की अवैध सत्ता रखते है|

व्यवस्थापिका के कार्य


आज व्यवस्थापिकाओ के बारे में अनेक विशेषण प्रचलित हैं कुछ लोग इन्हें 'रबड़ की मोहर', ' बातूनी  दुकानें 'और 'धोखाधड़ी की दिखावटे 'तक कह कर पुकारने लगे हैं, लेकिन इस सब विशेषता के बावजूद भी व्यवस्थापिका अनेक शक्तियों से संपन्न होने के कारण महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करती है |

मोटे रूप में व्यवस्थापिकाएं दो प्रकार की होती हैं|

1. परंपरागत अथवा सरकारी कार्य

2आधुनिक अथवा राजनीतिक कार्य

व्यवस्थापिका द्वारा किए जाने वाले सरकारी कार्य निम्नलिखित हैं|

विधायी  कार्य


व्यवस्थापिका का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है कानून बनाना इसलिए नियम बनाने वाला विभाग कहां जाता है| रीनाड ने इस संबंध में लिखा है कि "आधुनिक विधानमंडल एक प्रकार से वे कारखाने हैं जिनका काम कानून निर्माण का है विधान मंडल में ही विधानमण्डल मे ही विधेयक  प्रस्तावित किए जाते हैं उन पर बहस  की जाती है और फिर उन्हें किसी संशोधन सहित या उसके बिना पास किया जाता है |या उन्हें किसी अन्य प्रक्रिया का अनुसरण करने के पश्चात स्वीकार कर लिया जाता है| "यह बात आम है कि विधेयकों के तीन वाचन होते हैं और हर हालत में उन विधेयकों को समितियों को सौंपा जाता है| ताकि उन पर विस्तार के साथ विचार किया जा सके |
आलोचकों के अनुसार प्रशासनिक जटिलता तथा दल संगठन के प्रमाण स्वरूप इस क्षेत्र में कार्यपालिका के पास पहल करने का अवसर अधिक है| ब्रिटिश संसद ने  सत्र 1967-68 सत्र 63 सरकारी विधेयक सफल हुए लेकिन व्यक्तिगत सदस्यों के 75 विधेयकों में से केवल 13 को ही सिवकृति मिल पाई |बहुधा  कार्यपालिका के पास विधायी प्रस्तावों पर निषेधाधिकार  प्रयुक्त  करने की शक्ति रहती है|

वित्तीय कार्य


व्यवस्थापिका राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का नियंत्रण एवं नियमन करती है |प्रत्येक वर्ष के आरंभ में वह अनुमानित आय व्यय को स्वीकृति प्रदान करती है| वह राष्ट्रीय बजट को पारित करती है जिसके द्वारा नए कर लगाए जाते हैं| और पुराने करो की दरें घटाई हो बढ़ाई जाती हैं या उन्हें समाप्त किया जाता है| बिना व्यवस्थापिका के अनुमति के एक पैसा खर्च नहीं किया जा सकता|

एलेन वाल  के शब्दों में किसी भी विधायिका के पास सरकार को खर्च के लिए धन देने का जो अधिकार होता है वह ऐसा परंपरागत अधिकार होता है जिसमें विधायिका सरकार की नीतियों में कुछ नियंत्रण लगाने में समर्थ होती है|

विकासशील राज्यों में ऐसे अनेक देश हैं जहां ऐसी संवैधानिक व्यवस्थाएं विधमान है जिनमें कार्यपालिका अध्यादेश तक से वित्तीय मांगे पारित कर लेती हैं|

न्यायिक कार्य


आमतौर से विधायीकाओं को न्यायिक कार्य प्रदान नहीं किए जाते हैं किंतु कतिपय देशों में विधायिकाएं  न्यायिक  प्रकृति के कुछ कार्यों का संपादन करती हैं| ब्रिटेन की लॉर्ड सभा देश का सर्वोच्च अपीलीय न्यायालय है |अमेरिकी राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाने पर कांग्रेश के ऊपरी सदन सीनेट महाभियोग की न्यायालय की भांति सुनवाई करके निर्णय करता है| भारत में राष्ट्रपति को हटाने के लिए महाभियोग पर इसी तरह की सुनवाई व निर्णय की व्यवस्था संसद करती है|
हमारा यह मत है कि विधायिकाओं को न्यायिक कार्य नहीं सौंपी जानी चाहिए क्योंकि उनका निर्वाचन न्यायिक कार्यों को संपन्न करने के लिए नहीं किया जाता है |विधायीकाये  खुद  कानून बनाकर उनकी न्यायिक व्याख्या का कार्य करेगी तो निश्चय ही शासन की शक्तियों का दुरुपयोग होगा|

निर्वाचन संबंधी कार्य


अनेक देशों में व्यवस्थापिकाऐ  निर्वाचन संबंधी कार्य करती है |इजराइल और भारत की संसद गणराज्य के राष्ट्रपति का निर्वाचन करती है कनाडा न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया के संसदीय ब्रिटिश संप्रभु को 3 नामों की सिफारिश करती हैं और उनमें से एक को गवर्नर जनरल का कार्यभार संभालने के लिए नामित किया जाता है
कई देशों में विधायकआए प्रधानमंत्री और उसके मंत्रियों के चुनाव का अनुमोदन करती है अमेरिका में राष्ट्रपति द्वारा मंत्री पद पर जिन व्यक्तियों का मनोनयन किया जाता है सीनेट  द्वारा उनका अनु समर्थन आवश्यक है जापान में सम्राट द्वारा जीस व्यक्ति को प्रधानमंत्री के तौर पर मनोनीत किया जाता है वहां डायट द्वारा उसका अनुमोदन आवश्यक है|

संविधान संशोधन संबंधी कार्य


लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में विधायिकाओं का सबसे महत्वपूर्ण कार्य संविधान में संशोधन करने का माना गया है विधायकआए जन संप्रभुता का प्रतिनिधित्व करती है |अतः संविधान जिन इच्छा के क्रियान्वयन में बाधक बनने लगे तो उसमें संशोधन के अधिकार व्यवस्थापिका के पास ही रखना तर्कसंगत है |संशोधन का यह अधिकार कुछ देशों के विधान मंडलों को आंशिक रूप से प्राप्त रहता है तो कुछ देशों में विधानमंडल को संशोधन का पूर्ण अधिकार प्रदान किया जाता है| इंग्लैंड की संसद जब चाहे तब संविधान में संशोधन कर सकती है क्योंकि वहां साधारण कानून और संविधान में अंतर नहीं है|
व्यवस्थापिकाओ के आधुनिक अथवा राजनीतिक कार्य के अंतर्गत वैधता प्रदान करने का कार्य सुरक्षा यंत्र कार्य प्रतिनिधित्व का कार्य हित सामूहिकरण  का कार्य शिक्षण कार्य छानबीन एवं निगरानी के कार्य का अध्यन किया जाता है|

निष्कर्ष

व्यवस्थापिका द्वारा जांच एवं निगरानी का डर कार्यपालिका और न्यायपालिका को सतर्क रखता है क्योंकि व्यवस्थापिका की भूमिका देश के रक्षाक एवं पहरेदारी  जैसी है या देश की न्यायपालिका,  कार्यपालिका एवं उच्च पदाधिकारियों से जवाब तलब करने का अधिकार रखती है संक्षेप में व्यवस्थापिकाए राजनीतिक व्यवस्था के प्रत्येक घटक की निगरानी रखने का कार्य करती है तथा शक्तियों के दुरुपयोग से बचाव करती हैं|

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