🇧 🇪  🇨 🇦 🇷 🇪 🇫 🇺 🇱 🇱 🙏

कोरोना हारेगा हम जीतेंगे। घर में रहे सुरक्षित रहे ��

Monday, April 20, 2020

दहेज प्रथा पर निबंध

दहेज प्रथा पर निबंध

जबसे भारतीय समाज में दहेज प्रथा का प्रचलन हुआ है, तभी से वह भारतीय नारी के साथ अनिवार्य रूप से जुड़ा हुआ है। प्राचीनकाल में विवाह के अवसर पर कन्या के माता-पिता वर पक्ष को दहेज के रूप में गहने, कपड़े और दैनिक उपयोग की अनेक वस्तुएँ देते थे। कन्या
की सखी-सहेलियों तथा परिवार के संबंधियों की ओर से भेंट स्वरूप दी जाने वाली वस्तएँ भी दहेज में दिए जाने का प्रचलन था।

प्राचीनकाल में दहेज के लिए कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं थी। परंतु समय में परिवर्तन हुआ, उसी के अनुरूप दहेज कन्या के विवाह के लिए अनिवार्य शर्त बन गया। गुणवती कन्याएँ भी दहेज की मांग पूरी न होने के कारण, अविवाहित रहने लगीं। कन्याओं को परिवार पर बोझ
समझा जाने लगा। इतना ही नहीं कन्या उत्पन्न होने पर परिवार में उदासी छाने लगी। यहाँ तक कि देश के कई क्षेत्रों में कन्या-वध का प्रचलन हो गया। अब तो दहेज की विभीषिका से बचने के लिए गर्भ में ही यह पता कर लिया जाने लगा है कि उत्पन्न होने वाली संतान लड़का है
या लड़की। लड़की उत्पन्न होने की संभावना व्यक्त होने पर गर्भपात करा दिया जाता है। इस प्रकार कन्या भ्रूण हत्या की जाने लगी है।

प्राचीनकाल में माता-पिता के प्रेम और प्रसन्नता का प्रतीक दहेज प्रथा आधुनिक काल तक-आते-आते माता-पिता के साथ-साथ भारतीय नारी के लिए भी अभिशाप बन गया। नारी का मूल्यांकन दहेज के आधार पर किया जाने लगा। दहेज कम लाने के कारण पतिगृह में नारी को
अनेक अपमानजनक स्थितियों से दो-चार होना पड़ रहा है। उन्हें अनेक प्रकार की शारीरिक,मानसिक यातनाएँ दी जाने लगी हैं। इससे भारतीय नारी का जीवन नरक से भी गया-गुजरा हो गया है।

प्रायः प्रतिदिन समाचारपत्रों में दहेज के कारण किसी-न-किसी महिला के जलने-मरने का समाचार मिलता है। दहेज भारतीय नारी के लिए एक अभिशाप बन गया है। पता नहीं दहेज कब, कहाँ नारी के जीवन के लिए खतरा पैदा कर दे। विवाह के दस-दस वर्ष बाद भी दहेज के लिए मारने, पीटने, अंग-भंग करने की घटनाएँ सामने आती रहती हैं।

आज समाज में नारी की श्रेष्ठता, शील, सौंदर्य और गुणों की अपेक्षा उसके माता-पिता के धन से आँकी जाने लगी है। कन्या की कुरूपता, तमाम अवगुण भी दहेज की चमक-दमक में दिखाई नहीं देते। एक ओर तो भारतीय नारी शारीरिक रूप से वैसे ही निर्बल होती है, दूसरे,
भारतीय समाज में पति को परमेश्वर मानने की भावना है-यही कारण है कि पति उसे चाहे जैसे प्रताड़ित कर लेता है। भारतीय नारी बिना विरोध किए सब कुछ चुपचाप सहन करती जाती है। जब सहनशक्ति समाप्त हो जाती है तो वह मृत्यु को गले लगा लेती है। दहेज के दानव केकारण अनेक होनहार युवतियों का जीवन नष्ट हो रहा है।

भारतीय नारी को तथा समाज को दहेज जैसी नारी-विरोधी तथा समाज को कलंकित करने वाली कुप्रथा को जन-आंदोलन चलाकर, उसके विकृत रूप को सभी के सामने प्रकट करना चाहिए। नारी-संस्थाओं, समाज सुधारकों, धार्मिक तथा राजनीतिज्ञों को भी इसका विरोध करना चाहिए। नारियों को चाहिए कि वे दहेज-लोलुपों से विवाह करने से इनकार करें। इसके साथ ही समाज में भी दहेज-लोभियों को सार्वजनिक रूप से प्रताड़ित किया जाए। उनका सामाजिक बहिष्कार किया जाए। लड़कों की माता भी भारतीय नारी ही है। अत: उसे चाहिए कि वह अपने पुत्र के विवाह पर दहेज लेने और पुत्री के विवाह पर दहेज देने का तीव्र विरोध करे। दहेज से
छुटकारा पाने के लिए भारतीय नारी को तथाकथित सामाजिक मर्यादा के खोल से बाहर निकलकर वयवहारिकता को अपनाना होगा. 
https://hindimesupport.in

No comments:

Post a Comment