Goonj Kaise Paida Hoti Hai

Goonj Kaise Paida Hoti Hai गूंज कैसे पैदा होती है ?

यदि तुम किसी बड़े कमरे में या मंदिर में जोर से आवाज़ लगाओ , तब तुम्हें अपनी ही आवाज़ बार – बार सुनाई देती है । इसे हम गूंज (Goonj) या प्रतिध्वनि कहते हैं । इसी प्रकार की गूंज (Goonj) किसी गहरी खाई या कुएं के पास आवाज़ लगाने पर भी सुनाई देती है । क्या तुम जानते हो कि गूंज कैसे पैदा होती है ?


हम जानते हैं कि ध्वनि , तरंगों ( Waves ) के रूप में एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाती है । हवा में ध्वनि का वेग 340 मीटर प्रति सैकेंड होता है । जब हम बोलते हैं , तब हमारे मुंह से निकली आवाज़ की तरंगें किसी दीवार या रुकावट से टकराती हैं और वापस लौट आती हैं ।

यह परावर्तित ध्वनि तरंगें हमें गूंज (Goonj) के रूप में सुनाई देती हैं , लेकिन यह जरूरी नहीं कि किसी बाधा से आवाज़ टकरा कर गूंज में बदल जाए । इसके लिए यह जरूरी है कि जिस वस्तु से आवाज़ टकराकर लौटती है , वह बोलने वाले व्यक्ति से कम से कम 17 मीटर की दूरी पर अवश्य होनी चाहिए । इसका कारण यह है कि किसी भी ध्वनि का प्रभाव हमारे कान पर एक सैकेंड के दसवें भाग तक रहता है ।

यदि एक आवाज़ कान तक आने के बाद , दूसरी आवाज़ 1/10 सैकेंड से पहले कान में पहुंच जाती है तब वह आवाज़ हमें सुनाई नहीं देगी । ध्वनि 1 / 10 सेकेंड में लगभग 34 मीटर की दूरी तय करती है । अत : यदि ध्वनि को परावर्तित करने वाली वस्तु हमसे 17 मीटर दूर होगी , तब हमारे मुंह से उस वस्तु तक जाने और लौटकर आने में लिया गया समय 1/10 सैकेंड हो जाएगा और वह ध्वनि हमें गूंज के रूप में सुनाई पड़ेगी ।


सभी वस्तुएं ध्वनि को परावर्तित नहीं करतीं। कुछ वस्तएं जैसे लकड़ी , जूट , गत्ता आदि ध्वनितरंगों । को सोख लेते हैं । ईंटों की दीवार , चट्टान , पानी , आदि ध्वनितरंगों को परावर्तित करके गूंज पैदा कर सकते हैं । बादलों का गर्जन हमें बार – बार सुनाई देता है , वह भी गूंज का एक उदाहरण है । सिनेमाघरों , बड़े बड़े भाषण वाले कमरों में गूंज के प्रभाव को कम करने के लिए ऐसे पदार्थ लगाए जाते हैं , जो ध्वनि को सोख लेते हैं और उसे परावर्तित नहीं होने देते । 

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