Pani Kya Hai

Pani Kya Hai पानी क्या है

जीवन के लिए वायु की तरह पानी (Pani) भी अत्यंत आवश्यक है । यदि धरती पर पानी (Pani) न होता , तब यहां जीवन भी संभव नहीं होता । पानी (Pani) के बिना हम कुछ घंटों से अधिक जीवित नहीं रह सकते । पेड़ – पौधे , मनुष्य तथा जानवर सभी को पानी की आवश्यकता होती है ।

शायद इसीलिए पृथ्वी पर 70 % पानी है और 30 % जमीन । पृथ्वी पर जितना भी जल है , उसका 97 % पानी समुद्रों में है । क्या तुम जानते हो कि पानी क्या है ?पानी हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का यौगिक है , जिसमें आयतन के हिसाब से दो भाग हाइड्रोजन और एक भाग ऑक्सीजन होती है ,

किन्तु पानी के गुण इन दोनों गैसों से एकदम अलग होते हैं । शुद्ध अवस्था में पानी में न कोई रंग होता है , न कोई गंध और न ही कोई स्वाद । प्रकृति में जल के अनेक स्रोत हैं । हमें नदियों , झीलों , झरनों , कुओं , वर्षा , समुद्र आदि से जल प्राप्त होता है ।


अन्य पदार्थों की तरह जल की भी तीन अवस्थाएं होती हैं – पानी , बर्फ और भाप । साधारण रूप में पानी तरल अवस्था में मिलता है , लेकिन जब इसे 0 डिग्री सेंटीग्रेड तक ठंडा किया जाता है , तब यह जमकर बर्फ में यानी ठोस अवस्था में आ जाता है ।

इसी प्रकार जब इसे 100 डिग्री सेंटीग्रेड तक गर्म किया जाता है , तब यह उबलने लगता है और गैसीय अवस्था में बदल जाता है । बर्फ का प्रयोग हम वस्तुओं को ठंडा करने में करते हैं । भाप की शक्ति से रेल का इंजन तथा टरबाइन आदि चलती हैं ।


प्रकृति से मिलने वाला पानी (Pani) शुद्ध अवस्था में नहीं होता । इसमें बहुत से खनिज पदार्थ और गैसें घुली होती हैं । इन अशुद्धियों के कारण जल में कुछ स्वाद पैदा हो जाता है । कुछ अशुद्धियों के घुलने के कारण पानी भारी ( खारा ) हो जाता है । भारी पानी साबुन के साथ आसानी से झाग नहीं बनाता , जबकि हल्का ( मृदु ) पानी साबुन के साथ आसानी से झाग बनाता है ।

इस विधि से भारी पानी और हल्के पानी की हम पहचान भी कर सकते हैं । पानी का भारीपन दो प्रकार का होता है । एक अस्थायी भारीपन और दूसरा स्थायी भारीपन । अस्थायी भारीपन कैल्शियम और मैग्नीशियम के बाइकार्बोनेटों की उपस्थिति के कारण होता है ।

पानी के उबालने से यह भारीपन दूर हो जाता है । स्थायी भारीपन कैल्शियम और मैग्नीशियम के क्लोराइडों और सल्फेटों के कारण होता है । इस भारीपन को सोडियम कार्बोनेट ( कपड़े धोने का सोडा ) डालकर दूर किया जाता है ।
पानी एक द्रव है , जिसके कई विलक्षण गुण हैं ।

जब यह ठोस अवस्था में होता है , तब यह द्रव अवस्था की अपेक्षा कुछ हल्का हो जाता है । यही कारण है कि बर्फ पानी में तैरती रहती है । पानी का घनत्व 4 डिग्री सेंटीग्रेड पर अधिकतम होता है । इस गुण के कारण जाड़ों में झील और तालाबों में पानी के ऊपर की सतह तो बर्फ में परिवर्तित हो जाती है ,

लेकिन नीचे का पानी नहीं जमता । इस कारण ठंडे प्रदेशों में मछलियां आदि जीव बर्फ के नीचे आराम से जिन्दा रह लेते हैं । पानी की संरचना ऐसी है कि इसमें अधिकतर वस्तुएं घुल जाती हैं । इसलिए यह महान विलायक के रूप में प्रयोग किया जाता है ।

समुद्रों का पानी खारा है , क्योंकि उसमें बहुत सारे खनिज घुले रहते हैं । पानी में हवा घुल जाती है , जिसे पानी में रहने वाले जीव सांस द्वारा लेते रहते हैं । पानी एक ऐसा तरल है , जो आसानी से वाष्पित नहीं होता , इसलिए अधिक समय तक मिट्टी में इसकी नमी बनी रहती है , जो पेड़ – पौधों के लिए बहुत ही उपयोगी है ।

विभिन्न प्राणियों में पानी अलग – अलग मात्रा में रहता है । पेड़ – पौधों में 60 % से 80 % तक , ताजे फलों में 85 % से 95 % तक और जलीय पौधों में 98 % तक पानी रहता है । मानव शरीर में 65 प्रतिशत जलीय अंश होता है ।
एक सभ्य मनुष्य पीने , नहाने और कपड़े धोने में औसतन 35 गैलन पानी खर्च करता है । पीने के पानी के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए ।

प्रायः पानी में टाइफाइड , कॉलरा , डायरिया , डायसेंट्री आदि भयंकर बीमारियों के कीटाणु होते हैं । इसलिए पानी को उबालकर पीना स्वास्थ्यकर होता है । पानी को छानकर , उबालकर , लाल दवाई या ब्लीचिंग पाउडर अथवा क्लोरीन मिलाकर कीटाणु रहित बनाया जा सकता है ।

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