Rubber Kya Hai

Rubber Kya Hai रबर क्या है ?

रबर (Rubber) वास्तव में एक ठोस कार्बनिक पदार्थ है , जिसमें लचीलेपन और आसानी से खिंचने का गुण होता है । यह अपनी लंबाई से आठ गुनी अधिक लंबाई तक खिंच जाती है । रबर का इतिहास भी उतना ही पुराना है , जितना प्रकृति का । रबर एक प्रकार के पेड़ों से प्राप्त की जाती है ।

रबर (Rubber) के इन पेड़ों के 30 लाख वर्ष पुराने अवशेष प्राप्त हुए हैं । रबर प्राप्त करने के लिए पेड़ की छाल को थोड़ा काट दिया जाता है , इस कटे स्थान से एक सफेद रंग का तरल पदार्थ निकलता है , जिसे लेटेक्स कहते हैं । इसी तरल पदार्थ के सूखने से रबर बनती है । इसको प्राकृतिक रबर कहते हैं । वास्तव में जिन पेड़ों के रस से रबर (Rubber) बन सकती है , उनकी चार सौ से भी अधिक किस्में हैं । हर एक प्रकार के पेड़ से अलग – अलग मात्रा में अलग – अलग प्रकार की रबर प्राप्त होती है ।


रबर जिस पेड़ से सबसे अधिक मात्रा में मिलती है , उसका नाम हैविया ब्रसलीनसिस ( Hevea Brasliensis ) है । यह करीब 120 फुट ऊंचा होता है । एक दूसरा पेड़ जिससे रबर मिलती है , उसे कैस्टिला कहते हैं । रबर ” उत्पादन का वास्तविक विकास 18 वीं शताब्दी में हुआ , जब इसके पेड़ों के नमूने अमेरिका पहुंचे। रबर के विषय में एक बड़ी दिलचस्प बात है ।

जब कोलंबस ने अपनी दूसरी समुद्री यात्रा की , तो उसने हैती के निवासियों के बच्चों को गेंद से खेलते देखा जो उछलती थी । यह गेंद भी उसी पेड़ के रस को जमा कर बनाई गई थी । इस रस को यूरोप ले जाया गया । वहां के एक अंग्रेज वैज्ञानिक जोसफ गेस्टले ने देखा कि इसके रगड़ने से पेंसिल का लिखा मिट जाता है , तब उसने इसका नाम रबर रख दिया । रबर का मूल स्थान ब्राजील है ।

सन 1800 के लगभग एक अंग्रेज ने कुछ पौधे यहां से ले जाकर लंदन के कीव ( Cew ) गार्डेन और लंका में लगवाए । आज संसार में प्राकृतिक रबर का प्रमुख उत्पादक मलाया है । प्राकृतिक रबर की शक्ति और लचीलेपन को उसमें सल्फर मिलाकर बढ़ाया जाता है । इस प्रक्रिया को रबर की क्योरिंग ( Curing ) करना या वल्फेनाइजेशन करना कहते हैं । इसके घिसाव को कम करने तथा शक्ति बढ़ाने के लिए इसमें कार्बन ब्लैक , सिलिका और रुई का रेशा मिलाते हैं ।

      19 वीं शताब्दी में रबर का उपयोग इसके अद्भुत गुणों के कारण बहुत बढ़ गया और प्राकृतिक तरीकों से प्राप्त रबर से संसार की मांग को पूरा करना मुश्किल हो गया , तब वैज्ञानिकों ने रबर निर्माण के कृत्रिम तरीकों का विकास करना शुरू किया । कृत्रिम रबर का निर्माण द्वितीय महायुद्ध के दौरान सर्वप्रथम जर्मनी में हुआ । इसके बाद अन्य देशों में भी कृत्रिम तरीकों से रबर बनाई जाने लगी । आज संसार के समस्त उत्पादन में 50 % प्रतिशत से अधिक रबर कृत्रिम तरीकों से बनाई जाती है ।


     रबर हमारे लिए बहुत उपयोगी है । इससे टायर , ट्यूब , पाइप , बरसाती , कारपेट , वाटरप्रूफ कपड़े , थैले , बर्तन , खिलौने , मशीनों के पुर्जे तथा उद्योगों और घरों में उपयोग होने वाली अनगिनत वस्तुएं बनाई जाती हैं । बिजली के तारों को विद्युत कुचालक बनाने के लिए रबर की परत चढ़ाई जाती है ।


कृत्रिम ( Synthetic ) रबर पर रसायनों का प्रभाव नहीं पड़ता । इसलिए इसका उपयोग उद्योगों में मशीनों के पार्ट्स बनाने के लिए किया जाता है । सिलिकॉन ( Silicon ) को रबर में मिलाकर सिलिकॉन रबर बनाई जाती है । सिलिकॉन के कारण इस प्रकार की रबर पर अत्यधिक ताप या शीत का प्रभाव नहीं पड़ता । अत : इनका उपयोग जेट इंजनों की सील्स ( Seals ) व अन्य महत्वपूर्ण उपकरण आदि बनाने में किया जाता है ।

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