Taral Padarth Bhap Mein Kaise Badalate Hai

Taral Padarth Bhap Mein Kaise Badalate Hai तरल पदार्थ भाप में कैसे बदलते है ?

बरसात के दिनों में सड़कों और गलियों में भरा पानी कुछ ही घंटों में सूख जाता है । इसी प्रकार गर्मियों में गीले कपड़े कुछ ही समय में सूख जाते हैं । खुले बर्तनों में रखा पानी कम हो जाता है । क्या तुम जानते हो कि यह पानी कहां चला जाता है ? हम कहते हैं कि पानी भाप बनकर उड़ गया या पानी का वाष्पीकरण हो गया ।
       वाष्पीकरण कैसे होता है ? इस बात को समझने के लिए हमें पदार्थ की संरचना के विषय में जानना होगा । प्रत्येक पदार्थ (Padarth) अणुओं से मिलकर बना होता है और इन अणुओं के बीच में आकर्षण बल होता है । इस बल को संशक्ति बल ( Cohesive Force ) कहते हैं । इसी बल के द्वारा अणु एक दूसरे से आपस में बंधे रहते हैं और तितर – बितर नहीं होते । जब यह आकर्षण – बल बहुत अधिक होता है , तब पदार्थ (Padarth) ठोस अवस्था में रहता है । जब हम पदार्थ (Padarth) को गर्म करते हैं , तब पदार्थ के अणु अधिक गतिशील हो जाते हैं ।

अणुओं की यह गति उनके बीच के आकर्षण – बल को कम करने लगती है , अर्थात अणुओं की यह गति उन्हें अलग – अलग करने की कोशिश करती है । जब अणुओं  की गति से पैदा हुआ बल , उन्हें आपस में जोड़े रखने वाले संशक्ति ( Cohesion ) बल के बराबर हो जाता है , तब पदार्थ ठोस अवस्था से तरल अवस्था में बदलना शुरू कर देता है । यदि तरल को और अधिक गर्म किया जाए , तब उष्मा द्वारा अणुओं की गति का बल संशक्ति – बल से अधिक होता जाता है और तरल पदार्थ , गैस में बदलना शुरू हो जाता है ।

अर्थात उसके अणु मुक्त होकर हवा में जाने लगते हैं । द्रव की सतह से अणुओं का मुक्त ही वाष्पीकरण कहलाता है । सामान्यतः वाष्पीकरण हर तापमान पर होता रहता है , लेकिन जैसे – जैसे तापमान बढ़ता है , वाष्पीकरण और तेजी से होने लगता है । इसी क्रिया के फलस्वरूप गीले कपड़े छाया में देर में सूखते हैं और धूप में जल्दी सूख जाते हैं , क्योंकि धूप में अधिक गर्मी से अणुओं की गति भी तेज हो जाती है और पानी वाष्प बनकर तेजी से उड़ जाता है ।

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