Ureniyam Dhatu Kya Hai

Ureniyam Dhatu Kya Hai यूरेनियम धातु क्या है ?

यूरेनियम (Ureniyam) एक आश्चर्यजनक गुणों वाली धातु है , जो मानव जाति के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हुई है । इससे विशेष प्रकार की किरणें निकलती रहती हैं , जिन्हें रेडियोधर्मी किरणें ( Radio – active rays ) कहते हैं । ये किरणें मानव जाति के लिए बहुत ही उपयोगी हैं । यूरेनियम ही एक ऐसी धातु है , जिसका उपयोग मनुष्य ने परमाणु बम बनाने के लिए किया है । 

प्राकृतिक यूरेनियम (Ureniyam) में दो मुख्य आइसोटोप्स का मिश्रण होता है । यूरेनियम -238 और यूरेनियम -235 । प्रकृति में पाया जाने वाला 99.27 प्रतिशत यूरेनियम- 238 होता है और शेष 0.72 युरेनियम -235 ।

यूरेनियम (Ureniyam) धातु की खोज सन 1789 में मार्टिन हैनरिक क्लाप्रौथ ( Martin Heinrich Klaproth ) नामक और शेष 0.72 यूरेनियम -2351 वैज्ञानिक ने पिच ब्लेंड ( Pitch Blende ) नामक खनिज से की थी । उन्होंने इसका नाम यूरेनिट ( Uranit ) रखा लेकिन एक वर्ष बाद क्लाप्रौथ महोदय ने इसका नाम बदल कर यूरेनस ( Uranus ) ग्रह के नाम पर यूरेनियम ( Uranium ) रख दिया । 18 वीं सदी के अंत तक वैज्ञानिक यूरेनियम के कई यौगिक बना चुके थे । 1896 में हैनरी बैकरल ने यूरेनियम के प्रमुख गुण रेडियोधर्मिता ( Radio – activity ) का पता लगाया । 

यूरेनियम (Ureniyam) एक सफेद चमकदार रंग की धातु है , लेकिन वायुमंडल के संपर्क में आने से इसका रंग काला पड़ जाता है । यह प्रकृति में मिलने वाली सबसे भारी धातु है । इसके एक घन फीट ( Cubic Foot ) टुकड़े का भार लगभग आधा टन होता है । शुरू – शुरू में यूरेनियम का प्रयोग रेशम और पोर्सलीन ( Porcelain ) के बर्तनों पर रंगाई करने के लिए होता था ।

 यूरेनियम के दो अद्भुत गुणों के कारण इसकी उपयोगिता आज संसार में बहुत बढ़ गई है । यूरेनियम के नाभिकों से निकलने वाली रेडियोधर्मी किरणें हमारे लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हुई हैं । इन किरणों को कृषि , उद्योग जीव विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में प्रयोग किया जाता है । यूरेनियम का दूसरा उपयोग परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में हुआ है । सन 1938 में यूरेनियम के परमाणुओं के नाभिकों पर न्यूट्रान ( Neutrons ) की बौछार करके नाभिकीय विखंडन ( Nuclear fission ) प्रक्रिया की खोज की गई ।

नाभिकीय विखंडन वह प्रकिया है , जिसमें यूरेनियम -235 के नाभिक पर न्यूट्रानों की बौछार करके उन्हें दो हिस्सों में तोड़ा जाता है । इस प्रक्रिया में बहुत अधिक ऊर्जा पैदा होती है । नाभिकीय विखंडन की प्रक्रिया द्वारा ही सन 1945 में यूरेनियम से परमाणु बम बनाया गया और द्वितीय विश्व युद्ध में दुश्मन देश ने इसे जापान के हिरोशिमा नगर में डाल दिया । इस बम ने सदियों में बसने वाले शहर को पल भर में तहस – नहस कर दिया ।

आज नाभिकीय विखंडन की प्रक्रिया को ऊर्जा उत्पादन के लिए लगभग सभी देश प्रयोग में ला रहे हैं । तुमको यह जानकर आश्चर्य होगा कि एक पौंड यूरेनियम से इतनी ऊर्जा पैदा हो सकती है , जितनी कि 30 लाख पौंड कोयले को जलाकर पैदा होती है ।

इसलिए यूरेनियम -235 आइसोटोप ( Isotope ) को ऊर्जा उत्पादन के लिए परमाणु भट्ठियों में प्रयोग करते हैं । परमाणु भट्ठियों से पैदा हुई ऊष्मा से पानी को गर्म करके भाप बनाई जाती है । इस भाप से टरबाइन चलती है और बिजली पैदा की जाती है । यूरेनियम का उपयोग X– किरणें ( X – rays ) और गामा किरणों को अवशोषित करने में भी किया जाता है । 

यूरेनियम पृथ्वी की पपड़ी में संयुक्त अवस्था में मिलता है । धरती की पपड़ी के 10 लाख भागों में चार भाग यूरेनियम के होते हैं । चट्टानों में भी यूरेनियम यौगिक के रूप में मिलता है । पिच ब्लैंड यूरेनियम का ऐसा अयस्क ( Ore ) है ,

जिसमें दूसरे अयस्कों की तुलना में अधिक यूरेनियम होता है । अफ्रीका , कनाडा , आस्ट्रेलिया , चेकोस्लोवाकिया , अमेरिका , इंग्लैंड तथा भारत में यूरेनियम के अयस्क मिलते हैं , जिनसे यूरेनियम धातु प्राप्त की जाती है । भारत परमाणु ऊर्जा का प्रयोग करने वाला प्रमुख देश है ।

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