Helium Gas Kya Hai हिलियम गैस क्या है ?

Helium Gas Kya Ha

अधिकतर गैसें ऐसी हैं , जिन्हें प्रयोगशाला में तैयार किया जा सकता है , लेकिन कुछ गैसें ऐसी भी हैं , जो हमें केवल प्रकृति से ही प्राप्त होती हैं ।
         हीलियम (Helium) गैस भी एक ऐसी ही गैस है । यह एक अक्रियाशील ( inactive ) गैस है । इसमें न रंग होता है , न गंध और न स्वाद । हीलियम की कुछ ऐसी विशेषताएं हैं , जिनके कारण यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध हुई है । हल्केपन में इस गैस का हाइड्रोजन के बाद दूसरा स्थान है , लेकिन इसकी विशेषता है कि यह आग नहीं पकड़ती , जबकि हाइड्रोजन आग पकड़ती है ।

इसके हल्केपन और आग न पकड़ने के गुण के कारण इसे मौसम की जानकारी प्राप्त करने वाले गुब्बारों में प्रयोग किया जाता है । इसी कारण इसे सेना और नौसेना में भी इस्तेमाल किया जाता है । दमे के मरीजों को आसानी से सांस लेने के लिए हीलियम (Helium) दी जाती है । गोताखोर जब अपना काम समाप्त करके लौटते हैं , तब उन्हें सामान्य स्थिति में लाने के लिए हीलियम और ऑक्सीजन का मिश्रण दिया जाता है ।

इसे एल्यूमिनियम धातु को वेल्ड करने के काम में भी लाते हैं । हीलियम और नियान के मिश्रण से एक विशेष प्रकार की किरणें पैदा की जाती हैं , जिन्हें लेसर किरणें कहते हैं । हीलियम (Helium) गैस को -289 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान पर द्रव रूप में भी बदला जा सकता है । द्रव हीलियम का उपयोग अत्यन्त कम ताप पर किए जाने वाले कार्यों में होता है ।
      

इस गैस का पता सबसे पहले 1896 में अंग्रेज वैज्ञानिक जोसफनार्मन लॉकायर ( JosephNorman Lockyer ) और पियरे जैनसन ( Pierre Janssen ) ने अलग – अलग लगाया । सूर्य में उपस्थित तत्त्वों की जानकारी प्राप्त करने के लिए वे अपने स्पेक्ट्रोस्कोप द्वारा सूर्य के वर्णक्रम ( Spectrum ) का अध्ययन कर रहे थे । उन्हें इस वर्णक्रम में एक ऐसी रेखा ( Line ) मिली , जो पहले कभी नहीं देखी गई थी ।

यह रेखा किसी नए तत्व की उपस्थिति बताती थी । बाद में इस तत्व का नाम यूनानी शब्द हीलियोस ‘ ( Helios ) अर्थात ‘ सूर्य ‘ के नाम पर हीलियम रखा गया । बाद में वैज्ञानिकों ने यह भी पता लगा लिया कि हमारे वायुमंडल में भी हीलियम है , लेकिन इसकी मात्रा बहुत कम है । वायुमंडल में लगभग ढाई लाख घनफुट क्षेत्र में एक घनफुट हीलियम होती है ।
     अमेरिका के कुछ भाग जैसे टैक्सास , न्यू मैक्सिको , कंसास आदि ऐसे स्थान हैं , जहां पर वातावरण में हीलियम की मात्रा 8 % तक होती है । यह गैस कनाड़ा , अफ्रीका , और सहारा मरुस्थल में भी पाई जाती है । संसार में हीलियम अमेरिका में सबसे अधिक मात्रा में मिलती है । इसलिए अमेरिका ही अन्य देशों को सबसे अधिक हीलियम बेचता है । पहले यह गैस बहुत महंगी थी , लेकिन अब काफी सस्ती हो गई है ।

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Ghadiyo Ke Madik Kya Hote Hai घड़ियों के मणिक क्या होते हैं ?

Ghadiyo Ke Madik Kya Hote Hai

घड़ी खरीदते समय अक्सर लोग यह जरूर पूछते हैं कि इस घड़ी में कितने ज्वेल्स हैं । घड़ियों (Ghadiyo) पर प्रायः ज्वेल्स की संख्या लिखी भी होती है । लोगों का मानना है कि घड़ी में जितने अधिक ज्वेल्स होंगे , वह उतना ही सही समय बताने वाली और टिकाऊ होगी । आखिर ये ज्वेल्स होते क्या हैं और घड़ियों में क्यों लगाए जाते हैं , क्या तुम जानते हो ? आओ हम तुम्हें बताते हैं ।

         अच्छी घड़ी वही है , जो सही समय दे और जल्दी खराब न हो । यदि तुम किसी घड़ी (Ghadiyo) को खोल कर देखो , तब तुम देखोगे कि इसके अंदर का ढांचा बहुत पेचीदा है । इसमें बहुत से अलग – अलग तरह के छोटे – बड़े पुर्जे होते हैं । एक घड़ी में 211 पुर्जे होते हैं । इन पुों में एक छोटा सा पहिया होता है , जो लगातार गतिशील दिखाई देता है । इसके साथ ही एक बाल जैसा पतला तार होता है , जिसे कमानी कहते हैं ।

जब कमानी में हम चाबी देते हैं , तब घड़ी टिक् – टिक् की आवाज करने लगती है । वास्तव में चाबी देने पर कमानी में जमा ऊर्जा ही घड़ी को चलाती है । इस पहिए के अलावा और भी कई पहिए होते हैं , जो लगातार घूमते रहते हैं । यही पहिए घंटा , मिनट और सेकेंड की सुइयों को घुमाते हैं । इन पहियों की धुरियां चूलों पर टिकी रहती हैं । इनके घूमने से इन चूलों और धुरियों के बीच में रगड़ यानी घर्षण पैदा होता है ।

इस रगड़ से चूल और धुरियां जल्दी ही घिस सकती हैं और इस तरह घड़ी (Ghadiyo) की कार्यक्षमता जल्दी ही कम हो सकती है । इस घर्षण को कम करने के लिए चूलों के स्थान पर बहुत ही सख्त एवं चिकने पदार्थों के छोटे – छोटे टुकड़े लगाए जाते हैं । इन्हीं टुकड़ों को घड़ी का ज्वेल कहा जाता है । आमतौर पर ज्वेल रूबी यानी माणिक तथा नीलम जैसे कीमती पत्थर के बने होते हैं , जो हीरे से थोड़े ही कम सख्त होते हैं ।

ये बहुत चिकने तथा मजबूत होते हैं । इन ज्वेल्स पर टिके घड़ी के पुर्जे बहुत दिनों तक खराब नहीं होते और घर्षण ठीक रहने के कारण पहियों की गति में रुकावट नहीं आती । इसलिए घड़ी ठीक समय प्रदर्शित करती है । घड़ी में जितने अधिक ज्वेल्स लगे होंगे , वह उतना ही ठीक समय देगी और अधिक दिन चलेगी । इस प्रकार ज्वेल्स का प्रयोग घड़ी को अधिक समय तक सही समय बताने के लिए किया जाता है ।

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